चीन खेल रहा है कश्मीर में खून की होली...

आज अखबार शहीदों की खबर से रंग गए हैं आैर सरकार जुमलों के रंग से...रटा रटाया बयान आ गया है कि शहादत बेकार नहीं जाएगी...तो भार्इ शहादत बेकार कब गर्इ है...आज मैं आपको बताने की कोशिश करूंगा कि कश्मीर में असल में क्या हो रहा है आैर फिर इसके पीछे की कहानी क्या है...

पत्थरबाजी-इन दिनों कश्मीर में जिस तरह से पत्थरबाजी बढी इसके मायने बहुत दूसरे हैं..पहले यह पत्थरबाजी पैसे के लिए सिर्फ युवा करते नजर आते थे अब इसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हो गए हैं दरअसल अब कश्मीर में सिर्फ पकिस्तान का इंटेरेस्ट नहीं है इसमें चीन भी शामिल हो गया है.इसके इशारे पर अब पत्थर का इस्लामीकरण कर दिया गया है...युवाआें काे बरगलाकर यह परिभाषित किया गया कि जिस तरह मक्का मदीना में हज करके शैतान को पत्थर मारने से बरकत मिलती है..वही बरकत मिलेगी आैर इसमें आतंकी मौलाना कामयाब रहे आैर इस समय बच्चों को सेना शैतान की शक्ल में नजर आ रही है.

चीन-पकिस्तान की कश्मीर नीति अब चीन ही तय कर रहा है.इसी नीति के तहत अब बलूचिस्तान को पांचवा राज्य घोषित करने जा रहा है.यह विवादित क्षेत्र है आैर एेसा हाेता है तो फिर भारत के लिए चिंता की बात है.दूसरी बात जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सर्इद पर वीटो लगाकर उसने चरमपंथी गुटों को भी अपने पक्ष में कर लिया है...या यूं कहें कि उन्हें हफता दिया है उनकी जान बचाने का
आैर अब पूरे पकिस्तान में उसकी सडक परियोजना भी आरपार हो रही है जाे चीन के लिए न केवल नया बाजार बनेगी बल्कि रणनीतिक रूप से भी यह बेहद कारगर होगी. चीन अपने पर्ल नेक कार्यक्रम के तहत पूरे भारत को घेरने में लगा हुआ है आैर पिछले साल हुर्इ राजनीतिक चूक के कारण चीन नेपाल में घुसने में कामयाब रहा आैर वह अब रेललाइन बिछाने जा रहा है...यानी अब भारत के भीतर अब नक्सलियाें को वह नेपाल में बैठकर मदद करेगा
पत्थरबाजी को लेकर पकिस्तान की बदली रणनीति चीन की है.चीन की गोद में बैठकर पाकिस्तान वही कर रहा है जो चीन कह रहा है.चीन चाहता है कि चाहता है की कश्मीर का मुददा गर्म रहे आैर भारत इससे बाहर न निकल पाए.इसमें अगर कोर्इ स्कूली बच्चा मौत का शिकार हो जाए तो उसे अंतरराष्टीय मुददा बना पाए आैर फिर दबाव बने टेबल पर आकर बात करने का...उनकी शर्त पर
पकिस्तान-पकिस्तान में सरकार सेना चलाती है तो उसे मुल्क से बहुत मतलब नहीं है जितना ही युद्घ होगा उतना ही धनअर्जन होगा...इसी रणनीति पर काम करती है...रही बात अन्य चीजों की तो वहां उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं...परजीवी स्टेट की तरह कभी अमेरिका के रहमों करम पर ताे कभी चीन के रहमोंकरम पर अपने आप को जिंदा रखे हुए है.
भारत-भारत को रणनीति बदलनी होगी.पकिस्तान से काम नहीं चलेगा बल्कि आतंक की आहट क्या है उसे चीन को बताना होगा...वियतनाम से कुछ बात करनी होगी रूस से भी चर्चा जरूरी है...बाकी डोभाल से बताएंगी
सेना-यह पहली बार नहीं है.१९५० से यह चला आ रहा है.यह टेरन इतनी खतरनाक है कि यहां यह सब हाेता रहता है...यह अलग बात है की कारगिल की युद्घ के बाद शहीद घर पहुंचने लगे हैं आैर सब बातें सामने आने लगी हैं वरना यह बातें सेना बताती नहीं थी.उसे अपने तरीके से सुलझाती थी...अब सेना का तरीका क्या है यह बताने की जरूरत नहीं है
मायने---मतलब यह कि अब असली जंग पकिस्तान से नहीं अर्थव्यवस्था से है जो कि चीन की है...अगर उसे तोडना है ताे उससे व्यापार बंद करना होगा...चीन से व्यापार आज अगर बंद करने की घोषणा हो जाए तो कश्मीर में पत्थरबाजी कल ही रूक जाएगी.सबसे बडा आयात हम चीन से करते हैं आैर इसे तोडना होगा...एेसा होते ही पूरी चीनी अर्थव्यवस्था हिल जाएगी आैर हमें जरूरत नहीं होगी जंग की...सीधी बात की कश्मीर में छदम हस्ताक्षेप चीन बंद करें...वरना जंग का तरीका बदलने में हम कम नहीं है...सरकार को अब हवार्इ दौरे के बजाय जमीन पर, अर्थव्यवस्था पर जंग की तैयारी करनी होगी

कश्मीर-यहां सरकार को भी समझाने का तरीका बदलना होगा आैर युवाआें को भी समझने का...२०१० में मैने कश्मीर गया था वहां मैने सीधे बात की कि अगर अवसर मिले तो कहां जाएंगे पकिस्तान...चीन...आजादी या भारत...साफ कहा था पकिस्तान में हम मुहाजिर हो जाएंगे जनाब जाने का मतलब ही नहीं...चीन से तो कोर्इ मतलब ही नहीं है आैर आजाद होकर करेंगे क्या है क्या हमारे पास...भूखे मरने की नौबत आ जाएगी...भारत ही हमारे लिए बेहतर है...अब अगर ये बात है तो फिर इसे बढानी होगी एक बात आैर कही थी कि हमें मुफती आैर अब्दुल्ला परिवार से आजादी चाहिए अब इसके मायने में नहीं समझ पाया...कश्मीरियों को तय करना होगा कि उन्हें सच में क्या चाहिए

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