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एक कहानी सोनार की...

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आनंद मणि  समुद्री तट से ये बात ​​​पिछले साल की ही तो है.हम 36 पत्रकार एक ऐसी यात्रा पर थे जहां हम दुबारा किसी भी सूरत में नहीं जाए सकते, एक माह के लिए एक साथ. सुबह सात बजे से ही प्रक्रिया शुरू हो गई .हम बस से यथास्थान पहुंच गए.आज के दिन हम ऐसी जगह थे.जहां हर किसी को प्रवेश नहीं मिलता,जगह का उल्लेख इसलिए नहीं क्योंकि यही करना जरूरी है जल की जान बसती है
​​पोत का प्राण होता हैसोने से महंगा सोनार पहली बार यहीं सुना हमनें 

यह वह सोनार है जिसने गाजी को चकमा देकर उसका तख्ता पलट दिया था और पाकिस्तान को अपने दूसरे युद्ध में मुंह की खानी पडी. हमने यहां देखा किस तरह से कागज पानी में डूब जाए तो भी वह गिला नहीं होता. पानी को उल्टा लटका दो फिर भी वह गिरता नहीं.पहली बार लोहार से खतरनाक सोनार देखा .सोनार इतना खतरनाक की वह अलग—अलग विमानों की ​फ्रिक्वेंसी छोड सकता है. ऐसी कई नायाब चीजें हमने देखीं बेहद नजदीक से आप यूं भले ही लगता हो कि वैज्ञानिक कुछ नहीं कर रहे हैं लेकिन जितने सी​मित साधन में वह अपने लक्ष्य को साध रहे हैं शायद ही कोई देश होगा जो इतना बेहतर परिणाम इतने कम संसाधन में दे सके और अंत आप लोगों को …

चीन खेल रहा है कश्मीर में खून की होली...

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आज अखबार शहीदों की खबर से रंग गए हैं आैर सरकार जुमलों के रंग से...रटा रटाया बयान आ गया है कि शहादत बेकार नहीं जाएगी...तो भार्इ शहादत बेकार कब गर्इ है...आज मैं आपको बताने की कोशिश करूंगा कि कश्मीर में असल में क्या हो रहा है आैर फिर इसके पीछे की कहानी क्या है...
पत्थरबाजी-इन दिनों कश्मीर में जिस तरह से पत्थरबाजी बढी इसके मायने बहुत दूसरे हैं..पहले यह पत्थरबाजी पैसे के लिए सिर्फ युवा करते नजर आते थे अब इसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हो गए हैं दरअसल अब कश्मीर में सिर्फ पकिस्तान का इंटेरेस्ट नहीं है इसमें चीन भी शामिल हो गया है.इसके इशारे पर अब पत्थर का इस्लामीकरण कर दिया गया है...युवाआें काे बरगलाकर यह परिभाषित किया गया कि जिस तरह मक्का मदीना में हज करके शैतान को पत्थर मारने से बरकत मिलती है..वही बरकत मिलेगी आैर इसमें आतंकी मौलाना कामयाब रहे आैर इस समय बच्चों को सेना शैतान की शक्ल में नजर आ रही है.
चीन-पकिस्तान की कश्मीर नीति अब चीन ही तय कर रहा है.इसी नीति के तहत अब बलूचिस्तान को पांचवा राज्य घोषित करने जा रहा है.यह विवादित क्षेत्र है आैर एेसा हाेता है तो फिर भारत के लिए चिंता की बात है.दूसर…

पत्रिका में पांच साल

आज की एेसी ही शाम करीब ७ बजे राजस्थान पत्रिका को पांच साल पहले मैनें ज्वाइन किया था.हालांकि आधिकारिक रूप में ७ फरवरी को ज्वाइनिंग हुर्इ लेकिन झालाना कार्यालय में ६ फरवरी को ही पहुंच गया था. तत्कालीन संपादक श्री मनोज माथुर ने मुझे ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा जी के नेतृत्व में काम करने के आदेश दिया. धर्म, पर्यटन, कृषि से शुरू हुआ सिलसिला रेलवे, एयरपोर्ट, मौसम, परिवहन, रोडवेज, एसीबी, सीबीआर्इ, फाइनेंस, डीआरआर्इ, र्इडी के रास्ते पर निकल पडा. यहीं मुलाकात हुर्इ श्री अशोक शर्मा जी से आैर संपादक आशुतोष जी से. अशोक जी ने खबरों की बारीकियां इतनी सिखार्इं कि एक माह में ३७ एक्सक्लूसिव खबर आैर फिर एक ही दिन तीन बार्इलाइन तक मिली.आशुतोष जी ने खबर के हर पहलु को लाने के लिए टकराने की ताकत दी.हर खबर पर हमेशा नजर मारने का मौका मिला. यहीं आगरा से आए श्यामवीर के साथ मिलकर हमने खबर ब्रेक की थी कि युवा देश से आतंकी बनने जा रहे हैं. कुछ कारणों से छप नहीं पार्इ लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने जब तीन महीने बार खबर मुंबर्इ से ब्रेक की तो बहुत खुशी हुर्इ देख कि खबर हमारे पास जयपुर में भी थी. तत्कालीन डेस्क हेड राजीव जैन …

फर्जी पायलट बनाने वाली हिसार हवार्इपटटी से कालेधन का खेल

हरियाणा का हिसार हवार्इअडडा यूं तो छोटी सी हवार्इपटटी है लेकिन बदनामी में इसका नाम सबसे बडा है.फिर चाहे फर्जी पायलट तैयार करने का मामला हो या फिर अब काले धन की हेराफेरी का.शांंत पडा रहने वाला हिसार का हवार्इअडडा प्रधानमंत्री मोदी के नोट बंद की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चार्टर विमान संचालित करने वाला हवार्इअडडा बन गया.सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां से हर दिन दो से तीन उडान हुर्इ है आैर वह भी सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों के लिए.
कालाधान खापने का काला खेल दरअसल पूर्वोत्तर राज्याें कर्इ जनजातियों को हर प्रकार के आयकर प्रावधान से छुट मिली हुर्इ है.कोर्इ भी आयकर के दायरे में नहीं आता है आैर न ही कोर्इ कानून लागू होता है.अब इसी गलियारे को चोरटाइप के चाटर्ड एकाउंटेंटस ने कालाधान का गलियारा बना डाला. नोट बंद की घोषणा के बाद एक के बाद एक चाटर्ड विमान दीमापुर पहुंचने लगे.
तीन करोड ने बिगडा खेल
इसी दौरान साढे तीन करोड रूपए पकडे गए आैर फिर रहस्मय तरीके से गायब भी हुए आैर अब फिर मिल गए हैं लेकिन इस छानबीन के दौरान जो चौंकाने वाली जानकारी आयकर अधिकारियों के सामने आर्इ उसने होश उडा दिए.आननफानन में चाट…

उत्तर प्रदेश की त्रिशंकु विधानसभा की बिछती चौसर

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उत्तर प्रदेश में सर्द की दस्तक के साथ चुनावी चौसर ने सरगर्मी बढ गर्इ है.राजनीति गलियारे भरे हुए हैं आैर बाहरी तापमान भले ही २४ हो लेकिन पार्टी मुख्यालयों के तापमान पर मर्इ का मौसम हावी है.चुनावी चौसर की बिछ रही बिसात में सभी अपनी मोहरें बिछने व्यस्त हैं.कोर्इ टिकट के लिए लाइन लगा रहा है तो कोर्इ मुख्यमंत्री पद का सपना संजाेए हैं.इस बिछती हुर्इ बिसात में मन किया की सबके दिल की हालत देखी जाए.चुनावी कबडडी में एक बार फिर से ताल ठोंकी जाए.मुलायम के दांव की मायावती के बिसात की आैर भाजपा के चार की आैर कांग्रेस के कमाल की चर्चा की जाए.फिर चार दिन का यह दृश्य हमें नजर आया. भाजपा का पलडा फिलहाल भारी है.पिछले चुनाव में दूसरे तीसरे आैर चौथे नंबर पर रहे कर्इ प्रत्याशी पहले से ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं. बाकी एक नंबर पर विजय पाने वाले भी टिकट के लिए लाइन में हैं. इतिहास गवाह है कि टिकट बंटने में जब जिस पार्टी में हंगामा हो तो वह जीत रही है. लखनउ, बाराबंकी, फैजाबाद, बस्ती, कुशीनगर, गोरखपुर, गाेंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, उन्नाव, अकबरपुर, कानपुर का कमोवेश यही हाल है.मतदाता यूं तो किसी से खुश नहीं है ले…

कहीं फिर न हो कंधार कांड, परोसे जा रहे चाकू-कांटे

जयपुर. सीमा पार कर हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश की सीमा सहित देश के सभी हवाईअड्डे अलर्ट पर हैं। तो दूसरी तरफ विमानन कंपनियां सुरक्षा में चूक कर रही हैं। हवाईअड्डे पर जांच में नोंकदार या फिर ब्लेड तक रखवा लेने वाली सुरक्षा के बावजूद विमान में ही स्टील का चाकू और काफी नोंकदार कांटे परोसे जा रहे हैं। वह भी एयर इंडिया की उड़ान में जो कि १९९९ में अपने विमान आईसी ८१४ का अपहरण झेल चुका हैं। उस समय एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय सेवा को इंडियन एयरलाइंस के नाम से जाना जाता था।  विमानों में यह है प्रतिबंधित  नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस)ने साफ तौर पर ७२ सामान की सीधी लिस्ट जारी की है। इन सभी को विमान में नहीं ले जाया जा सकता है। इसमें चाकू भी शामिल है। इसमें साफ है कि प्लास्टिक कटलरी में भी चाकू के लिए साफ माना किया गया है। हालांकि प्लास्टिक कटलरी में भी कई विमानन कंपनियां इसका इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा इसमें अन्य नुकली वस्तुएं भी शामिल हैं। इसके अनुसार स्टीनलेस स्टील का कांटा भी प्रयोग नहीं किया जा सकता है। क्या था कंधार कांड? २४ दिसंबर १९९९ को  काठमांडू हवाईअड्डे से इंडियन एयरला…

"क्लासमेट" से "क़त्ल" तक के सफ़र में राजदेव और शहाबुद्दीन

पटना। ऐसे "कलम के सिपाही" बड़े ही विरले ही होते है जो अपने "जीवन पर छाये मौत के साये" के बावजूद सच के खातिर बेधड़क बेलाग बेख़ौफ़ होकर लिखते रहते है। धन दौलत और तमाम प्रलोभवनो के बावजूद राजदेव " सच की शम्मा" जलाते रहे।                        दिवंगत पत्रकार राजदेव रंजन के बारे कहा जा सकता है कि वह एक व्यवहार कुशल, कलम से समझौता करने से कोसों दूर एक निडर पत्रकार और एक सम्मानित बैनर के सहारे " सच को सच" कहने वाले पत्रकार थे। एक ही इलाके एक ही परिवेश में पीला बढे शहाबुद्दीन और राजदेव एक दूर से परिचित थे। साथ ही वक्त के बदलते दौर में दोनों दो अलग अलग राहो पर चल निकले।लेकिन एक दौर वो भी आया जब वो और शहाबुद्दीन के क्लास मेट भी रहे। दोनो ने एस साथ पीजी किया था।इसी की वजह से इलाके में माना जाता था कि वह सांसद के करीब होंगे लेकिन उनकी कालान्तर में उनकी धारदार और ईमानदार लेखनी ऐसा समझने की इजाजत नहीं देती थी। पत्रकारिता की में कलम की धार और प्रखर करते हुए राजदेव अपनी पढाई भी जारी रखे हुए थे। अपनी अपराध से जुडी रिपोर्टिंग को और सशक्त करने के खातिर वकालत की भी डिग…