राजनीति की नीति का, है ना पारावार
जैसे चाहो मोड़ दो अर्थों का संसार
पल पल निष्ठा बदलना, राजनीति का खेल
आज गले जो मिल रहे कल वे ही अनमेल
मनुज बदलते हैं नहीं, बदल रहे हैं अर्थ
कल जिनके गुन गा रहे, अब दिखते वे व्यर्थ
मंत्री पद के लोभ में दल निष्ठा को तोड़
छोड़ छाड़ कर जा रहे ऐसी देखी होड़
संप्रदाय अरु जाति की राजनीति बेकार
कटुता दिन दिन बढ़ रही नफ़रत का संसार
सत्ता के सुख भोग की होड़ लगी चहुँ ओर
लूट मची सब ओर है, जित देखो तित चोर
कन्हेया लाल शर्मा
Monday, February 8, 2010
kumar visvash
दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का है अन्दर, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा !!!
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का है अन्दर, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा !!!
Sunday, July 19, 2009
पंचायत के आगे नतमस्तक है सरकार नहीं सम्भाल पा रहा है प्रशासन यंहा की व्यवस्था .......... जहा हम सारी दुनिया के साथ कदम ताल कर रहे है वही अभी हम हरियाणा में काफी पीछे है .......जहा लड़कियों के जनसंख्या काफी कम है शादी परेशानी और मौत का दूसरा नाम है ....अगर हो भी जाये तो गोत्र ...नहीं जीने देती क्यों की हमारे गोत्र में शादी .............अभी हाल में हुई एक घटना में एक लड़के ने I इसीलिए जहर खा लिया ........और पंचायत ने उसके परिवार वालो को सामाजिक बहिष्कार कर गाँव छोड़ने का तुगलकी फरमान सुना डाला ...क्यों की उन्होंने उस लड़की से शादी की जिस गोत्र के लोग उस गाँव में रहते थे ............शुरू हो गया पंचायतो का दौर और हुआ वही जिसका डर था ..........गाँव से निकल जाने का आदेश पंचायत द्वारा .............कई बार उठा बैठक हुई लेकिन फैसला वही रहा .......या तो गाँव छोडो या लड़की को लड़का तलक दे कर अपनी बहन माने आप ही सोचिये ये TUGLKI PHERMAN नहीं तो और क्या है ...क्या ESHI भारत की कल्पना हमारे महापुरषों ने की थी ..आज जहा सब स्वतंत्र है ....जहा दूसरी जाति शादी करनी को प्रोत्सहन दिया जाता है ..वही यहाँ DUSHRI गोत्र में शादी करने पर भी हंगामा बरपा रही है पंचायत .......और तो और प्रशासन भी नाकाम है वह पीडित परिवार को सही न्याय नहीं दिला पा रही है .......ये पंचायत क्या करेगी अभी तो पता नहीं .......लेकिन लड़के ने जहर खा कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश जरुर की
पंचायत के आगे नतमस्तक है सरकार नहीं सम्भाल पा रहा है प्रशासन यंहा की व्यवस्था .......... जहा हम सारी दुनिया के साथ कदम ताल कर रहे है वही अभी हम हरियाणा में काफी पीछे है .......जहा लड़कियों के जनसंख्या काफी कम है शादी परेशानी और मौत का दूसरा नाम है ....अगर हो भी जाये तो गोत्र ...नहीं जीने देती क्यों की हमारे गोत्र में शादी .............अभी हाल में हुई एक घटना में एक लड़के ने I इसीलिए जहर खा लिया ........और पंचायत ने उसके परिवार वालो को सामाजिक बहिष्कार कर गाँव छोड़ने का तुगलकी फरमान सुना डाला ...क्यों की उन्होंने उस लड़की से शादी की जिस गोत्र के लोग उस गाँव में रहते थे ............शुरू हो गया पंचायतो का दौर और हुआ वही जिसका डर था ..........गाँव से निकल जाने का आदेश पंचायत द्वारा .............कई बार उठा बैठक हुई लेकिन फैसला वही रहा .......या तो गाँव छोडो या लड़की को लड़का तलक दे कर अपनी बहन माने आप ही सोचिये ये TUGLKI PHERMAN नहीं तो और क्या है ...क्या ESHI भारत की कल्पना हमारे महापुरषों ने की थी ..आज जहा सब स्वतंत्र है ....जहा दूसरी जाति शादी करनी को प्रोत्सहन दिया जाता है ..वही यहाँ DUSHRI गोत्र में शादी करने पर भी हंगामा बरपा रही है पंचायत .......और तो और प्रशासन भी नाकाम है वह पीडित परिवार को सही न्याय नहीं दिला पा रही है .......ये पंचायत क्या करेगी अभी तो पता नहीं .......लेकिन लड़के ने जहर खा कर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश जरुर की
Wednesday, June 10, 2009
चुनाव आयोग जो एक सम्बधानिक संस्था है उस पर भी रसा कस्सी शुरू हे हो गयी ..समाजवादी पार्टी के एक वरिस्ट नेता ने इसके स्म्बैधानिक पद को कम करने के मांग उठाई है क्यों की इनके सपनों को आग उसे ने लगाई है और समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर पहुची है ..नहीं तो मिश्रा जी का भे कुछ जुगाड़ लग जाता और अफसरों को चक्कर कटवाते
अफसर उनके चक्कर नहीं कट रहे यही दुःख उनको सता रहा है क्यों के अब वो प्यासे है और शासन कुआ है ..सपा के शासन काल में मशीनरी का दुरूपयोग किसी से छुपा नहीं है ...वही व्यवस्था का गम उन्हें सता रहा है ...लेकिन अब उन्हें अंदाजा नही है के हवा बंद हो गयी है ...रुख बदल गया है ..सीयर अपने अपने जंगलो को लौट गए है ये कह के हम 5 साल बाद फिर आएंगे तब तक आप चुनाव आयोग को अपने बस में करने के कोशिश करए ..हम आप के साथ है .....लेकिन एक बात तो ये तय हो हे गयी की हमारे संबिधान में दम तो है ..लेकिन इन रंगे सियारों के हाथ ओरिजनल कॉपी पड़ा है ..जिसे वो मन माफिक बदलने के कोशिश करते है ..कुछ तो प्रोग्राम तो इस लिए बचे है ..क्यों की इन्हे उसका पासवर्ड नहीं मालूम है ..नहीं तो ये उसे भी कीडे के तरह चाट जाये ..........अब देखते है के ये इस चुनाव आयोग रुपी प्रोग्राम को मिटाने के लिए कितने कीडे लगते है वैस तो कीडो के संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है .......आगे आगे देखते है होता है क्या .................इंतजार करीए और ५ पाच साल बाद ...............कीडो को मारने का बंदोबस्त करीए वर्ना ये पूरा आयोग नहीं सम्विद्धन चाट जायेंगे .....अभे से कमर काश लीजये क्यों की अबकी बार चुके तो संबिधान गया ..........................
अफसर उनके चक्कर नहीं कट रहे यही दुःख उनको सता रहा है क्यों के अब वो प्यासे है और शासन कुआ है ..सपा के शासन काल में मशीनरी का दुरूपयोग किसी से छुपा नहीं है ...वही व्यवस्था का गम उन्हें सता रहा है ...लेकिन अब उन्हें अंदाजा नही है के हवा बंद हो गयी है ...रुख बदल गया है ..सीयर अपने अपने जंगलो को लौट गए है ये कह के हम 5 साल बाद फिर आएंगे तब तक आप चुनाव आयोग को अपने बस में करने के कोशिश करए ..हम आप के साथ है .....लेकिन एक बात तो ये तय हो हे गयी की हमारे संबिधान में दम तो है ..लेकिन इन रंगे सियारों के हाथ ओरिजनल कॉपी पड़ा है ..जिसे वो मन माफिक बदलने के कोशिश करते है ..कुछ तो प्रोग्राम तो इस लिए बचे है ..क्यों की इन्हे उसका पासवर्ड नहीं मालूम है ..नहीं तो ये उसे भी कीडे के तरह चाट जाये ..........अब देखते है के ये इस चुनाव आयोग रुपी प्रोग्राम को मिटाने के लिए कितने कीडे लगते है वैस तो कीडो के संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है .......आगे आगे देखते है होता है क्या .................इंतजार करीए और ५ पाच साल बाद ...............कीडो को मारने का बंदोबस्त करीए वर्ना ये पूरा आयोग नहीं सम्विद्धन चाट जायेंगे .....अभे से कमर काश लीजये क्यों की अबकी बार चुके तो संबिधान गया ..........................
बात करते है सत्यम् के जो अब अपने रास्ते पर आ रही है लेकिन क्या माजरा रहा किसी को कुछ समझ में आया केवल राजनिती के शिवा . ये ..लेकिन अब राहत के बात ये है की कंपनी ने अगर कुछ पुराने मित्रो को खोया तो उससे बड़े मित्रो का साथ भी उसे मिला ..कंपनी ने ४ करोड़ का शुद्ध लाभ भी कमाया ..इससे आशा बनते है के कंपनी के पुराने दिन फिर फिरेंगे .....इसे उम्मीद के साथ .............................जय हिंद
हा एक बात ये के माजरा समझ में आये तो बातये..................
हा एक बात ये के माजरा समझ में आये तो बातये..................
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