Sunday, September 19, 2010

मुश्किलें आई अगर तो, फ़ैसला हो जाएगा

मुश्किलें आई अगर तो, फ़ैसला हो जाएगा
कौन है पानी में कितने, सब पता हो जाएगा

दूरियाँ दिल की कभी जो, बढ़ भी जाएँ तो हुज़ूर
तुम बढ़ाना इक कदम, तय फासला हो जाएगा

लाए थे दुनियाँ में क्या तुम, लेके तुम क्या जाओगे
ये महल, ये रिश्ते-नाते, सब जुदा हो जाएगा

गर दुआ माँगोगे दिल से, और उस पे हो यक़ी
जब बुरा होना भी होगा, तो भला हो जाएगा

आरज़ू थी फूल इक, दामन में मेरे जाए खिल
सोचती हूँ न हुआ तो, क्या ख़ला हो जाएगा

ज़िंदगी का रास्ता होगा, बड़ा काँटों भरा
साथ तुम होगे तो “श्रद्धा” हौसला हो जाएगा

मेरे दामन में काँटे हैं, मेरी आँखों में पानी है मोहब्बत नाम जिसका है, ये उसने दी निशानी है श्रद्धा जैन

मेरे दामन में काँटे हैं, मेरी आँखों में पानी है
मोहब्बत नाम जिसका है, ये उसने दी निशानी है

क़ज़ा ही लगती है आसां, अगर जीना जुदाई में
मिटाना है मुझे खुद को, उसे यादें मिटानी है

वफ़ा के वादे हैं टूटे, ज़रा सी बात पर रूठे
सज़ा बन जाती है कुरबत, अजब दिल की कहानी है

मिटा कर नक्श कदमों के, बने अंजान हम फिर से
मिले शायद कभी हंस कर, कि लंबी ज़िंदगानी है

कहाँ क़ुरबान होता है, कोई भी संग में “श्रद्धा”
ये बातें हीर-रांझे की, हुई कब से पुरानी है

वो लौट न पाएँगे, मालूम न था हमको

छोटी सी भी मज़बूरी, कर देगी जुदा हमको
वो लौट न पाएँगे मालूम न था हमको

रिश्तों की कसौटी पर, खुद को ही मिटा आए
हम चलते रहे तन्हा, थे साथ नहीं साए
अश्कों के सिवा उनसे, कुछ भी न मिला हमको
वो लौट न पाएँगे, मालूम न था हमको

मौला ये बता दे मुझे, मेरा दिल क्यूँ सुलगता है
सूरज में जलन है गर, क्यूँ चाँद पिघलता है
साँसों के भी चलने से, लगता है बुरा हमको
वो लौट न पाएँगे मालूम न था हमको

सोचा कि मना लूँ उन्हें, मिन्नत भी कई कर लूँ
कदमों में गिर जाऊं, बाहों में उन्हें भर लूँ
होगा ये नही लेकिन, आसां जो लगा हमको
वो लौट न पाएँगे, मालूम न था हमको

गिरते हुए कदमों की, आहट पर न जाना तुम
मर जाएँगे हम यूँ ही, न अश्क़ बहाना तुम
आँसू ये तेरे अब भी, लगते हैं सज़ा हमको
वो लौट न पाएँगे, मालूम न था हमको

खलवतों में साँप जैसे काटे हैं दिन पाप जैसे

चलो कुछ बात करते हैं
ज़ुबाँ, जज़्बात करते हैं

कही न दिन गुज़र जाए
मोहब्बत फिर न मर जाए
जो है एहसास ज़िंदा ,
तो अभी मुलाकात करते हैं
चलो कुछ बात करते हैं

रहे न मिलन अधूरा अब
मुझे तुम पूरा कर दो अब
मिला के लब से लब को ,
शबनमी ये रात करते हैं
चलो कुछ बात करते हैं

खलवतों में साँप जैसे
काटे हैं दिन पाप जैसे
अभी सूने से आँगन में,
सुरमई बरसात करते हैं
चलो कुछ बात करते हैं

दूर कहीं जलती हो आग,

मेरी आँखों से तेरी आँखों तक
प्यार की जब हो गुपचुप बात
होंठ सिले हों, आँखें नम हो
मौसम बजा रहा हो साज
दूर कही शहनाई बजे और
बागों में खिल उठे गुलाब
स्पर्श तुम्हारा बजे तरंग बन
दूर कहीं जलती हो आग,
एक दूजे को जाने हम जब
मूक हमारे हो संवाद

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जब विद्यासागर जी ने चप्पल फेंकी फिर एक चप्पल चली। रोज ही कहीं ना कहीं यह पदत्राण थलचर हाथों में आ कर नभचर बन अपने गंत्वय की ओर जाने क...