Wednesday, August 30, 2017

...जो लौटकर सत्ता में न आए,

राजनीति में पैराशूट नेता तो आपने बहुत देखे होंगे लेकिन पैराशूट मुख्यमंत्री भी कई पाए गए हैं, यहां पैराशूट का पर्याय बदल रहा है और इसे अब उच्च सदन का नाम दिया जा रहा है, देखने में यह आया है कि जो नेता उच्च सदन से मुख्यमंत्री बना है वह दुबारा मुख्यमंत्री नहीं बना है, इसकी बानगी देखिए ...ऐसे में योगी का योग कुछ ठीक नहीं लग रहा है
उत्तर प्रदेश में उच्च सदन से मुख्यमंत्री बनने वाले दोबारा सत्ता में नहीं लौटे। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल सम्पूर्णानंद का और दूसरे नंबर अखिलेश यादव का रहा। उच्च सदन से मुख्यमंत्री बनने के बाद दुबारा सत्ता में न आने का रिकार्ड मायावती 2007, अखिलेश यादव 2012 के नाम है। अब आदित्य योगी नाथ भी विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। 
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल सम्पूर्णानंद जी का रहा। जो वाराणसी दक्षिण से विधायक हुआ करते थे। 5 वर्ष, 344 दिन तक मुख्यमंत्री रहे। दूसरे नंबर पर अखिलेश यादव 5 वर्ष, 108 दिन तीसरे नंबर पर मायावती 4 वर्ष, 360 दिन, चौथे नंबर पर पहले मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत 4 वर्ष, 335 दिन जो बरेली नगरपालिका से चुनाव जीते थे। सबसे छोटा कार्यकाल चन्द्रभानु गुप्ता का रहा जो 19 दिन तक मुख्यमंत्री रहे।
चौधरी चरण सिंह 328 दिन, त्रिभुवन नारायण सिंह 167 दिन, कमलापति त्रिपाठी 2 वर्ष, 69 दिन, राम नरेश यादव 1 वर्ष, 249 दिन, बनारसी दास 354 दिन, विश्वनाथ प्रताप सिंह 2 वर्ष, 39 दिन, श्रीपति मिश्र 2 वर्ष, 14 दिन, मुलायम सिंह यादव 3 वर्ष, 257 दिन, कल्याण सिंह 2 वर्ष, 52 दिन, राजनाथ सिंह 1 वर्ष, 131 दिन, रामप्रकाश गुप्त 351 दिन उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली है।

Tuesday, August 29, 2017

रेलवे है या मौत होने के बाद आने वाला महापं​डित

अब कह रहा है कि हर आदमी से चाहिए 11 हजार तब होगा उदधार
वैतरणी पार लगाने के लिए जिस तरह पंडित मांगते है उसी तरह अब रेलवे का चा​हिए 
रेल मंत्रालय को अलग-अलग कामों के लिए 8,56,020 करोड़ रुपये की जरूरत है. 
सुरक्षित और मुनाफे की रेल के लिए का यह एक्शन प्लान अगले 5 साल के लिए है.
यात्री किराए से घाटा --(लगभग 34,000 करोड़ रुपये)
7वें वेतन आयोग का भार--- (30,000 करोड़ रुपये) 
प्रोजेक्ट्स के लिए-- 4.83 लाख करोड़ रुपये
पंचवर्षीय जीर्णोद्धार--- 14,03,020 करोड़ रुपये की जरूरत है.
--------------------------


5 साल तक इन कामों के लिए चाहिए लाखों करोड़ 
नेटवर्क डीकंजेशन : 1,99,320 करोड़
नेटवर्क विस्तार (इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है): 1,93,000 करोड़
सुरक्षा के लिए (ट्रैक रिन्यूवल और ब्रिज निर्माण): 1,27,000 करोड़
लोकोमोटिव, कोच और वैगन (प्रोडक्शन और मेंटेनेंस): 1,02,000 करोड़
रेलवे स्टेशन विकसित करने और लॉजिस्टिक पार्क : 1,00,000 करोड़
हाई स्पीड रेल और एलीवेटेड कॉरिडोर : 65,000 करोड़
नॉर्थ ईस्ट और जम्मू-कश्मीर तक रेलवे कनेक्टिविटी: 39,000 करोड़
पैसेंजर सुविधा, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और अन्य : 30,700 करोड़
इन स्थितियों में आपकी जेब से कितना जाएगा
--सबसे टैक्स वसूला जाता है तो सभी 10,792 रुपये देने होंगे.
--टैक्स पेयर से वसूला जाता है तो प्रति टैक्सपेयर 2 लाख 80 हजार रुपये देय है.

Friday, August 18, 2017

एक कहानी सोनार की...

आनंद मणि समुद्री तट से
ये बात ​​​पिछले साल की ही तो है.हम 36 पत्रकार एक ऐसी यात्रा पर थे जहां हम दुबारा किसी भी सूरत में नहीं जाए सकते, एक माह के लिए एक साथ. सुबह सात बजे से ही प्रक्रिया शुरू हो गई .हम बस से यथास्थान पहुंच गए.आज के दिन हम ऐसी जगह थे.जहां हर किसी को प्रवेश नहीं मिलता,जगह का उल्लेख इसलिए नहीं क्योंकि यही करना जरूरी है. जल की जान बसती है
​​पोत का प्राण होता है 
सोने से महंगा सोनार 
पहली बार यहीं सुना हमनें 

यह वह सोनार है जिसने गाजी को चकमा देकर उसका तख्ता पलट दिया था और पाकिस्तान को अपने दूसरे युद्ध में मुंह की खानी पडी. हमने यहां देखा किस तरह से कागज पानी में डूब जाए तो भी वह गिला नहीं होता. पानी को उल्टा लटका दो फिर भी वह गिरता नहीं.पहली बार लोहार से खतरनाक सोनार देखा .सोनार इतना खतरनाक की वह अलग—अलग विमानों की ​फ्रिक्वेंसी छोड सकता है.

ऐसी कई नायाब चीजें हमने देखीं बेहद नजदीक से आप यूं भले ही लगता हो कि वैज्ञानिक कुछ नहीं कर रहे हैं लेकिन जितने सी​मित साधन में वह अपने लक्ष्य को साध रहे हैं शायद ही कोई देश होगा जो इतना बेहतर परिणाम इतने कम संसाधन में दे सके और अंत आप लोगों को लजीज व्यंजन का स्वाद याद ही होगा 
बाकी अगले अंक में 
राय देते रहिए कुछ याद दिलाते रहिए अगले तीस दिन तक हम आपको यूं ही दोबारा यात्रा कराने की को​शिश करेंगे




सरकार राज 


दादा भात और रॉयल राजेश 

कन्या ग्रुप 

खास लोगो के साथ आम 36 


Monday, May 1, 2017

चीन खेल रहा है कश्मीर में खून की होली...

आज अखबार शहीदों की खबर से रंग गए हैं आैर सरकार जुमलों के रंग से...रटा रटाया बयान आ गया है कि शहादत बेकार नहीं जाएगी...तो भार्इ शहादत बेकार कब गर्इ है...आज मैं आपको बताने की कोशिश करूंगा कि कश्मीर में असल में क्या हो रहा है आैर फिर इसके पीछे की कहानी क्या है...

पत्थरबाजी-इन दिनों कश्मीर में जिस तरह से पत्थरबाजी बढी इसके मायने बहुत दूसरे हैं..पहले यह पत्थरबाजी पैसे के लिए सिर्फ युवा करते नजर आते थे अब इसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हो गए हैं दरअसल अब कश्मीर में सिर्फ पकिस्तान का इंटेरेस्ट नहीं है इसमें चीन भी शामिल हो गया है.इसके इशारे पर अब पत्थर का इस्लामीकरण कर दिया गया है...युवाआें काे बरगलाकर यह परिभाषित किया गया कि जिस तरह मक्का मदीना में हज करके शैतान को पत्थर मारने से बरकत मिलती है..वही बरकत मिलेगी आैर इसमें आतंकी मौलाना कामयाब रहे आैर इस समय बच्चों को सेना शैतान की शक्ल में नजर आ रही है.

चीन-पकिस्तान की कश्मीर नीति अब चीन ही तय कर रहा है.इसी नीति के तहत अब बलूचिस्तान को पांचवा राज्य घोषित करने जा रहा है.यह विवादित क्षेत्र है आैर एेसा हाेता है तो फिर भारत के लिए चिंता की बात है.दूसरी बात जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सर्इद पर वीटो लगाकर उसने चरमपंथी गुटों को भी अपने पक्ष में कर लिया है...या यूं कहें कि उन्हें हफता दिया है उनकी जान बचाने का
आैर अब पूरे पकिस्तान में उसकी सडक परियोजना भी आरपार हो रही है जाे चीन के लिए न केवल नया बाजार बनेगी बल्कि रणनीतिक रूप से भी यह बेहद कारगर होगी. चीन अपने पर्ल नेक कार्यक्रम के तहत पूरे भारत को घेरने में लगा हुआ है आैर पिछले साल हुर्इ राजनीतिक चूक के कारण चीन नेपाल में घुसने में कामयाब रहा आैर वह अब रेललाइन बिछाने जा रहा है...यानी अब भारत के भीतर अब नक्सलियाें को वह नेपाल में बैठकर मदद करेगा
पत्थरबाजी को लेकर पकिस्तान की बदली रणनीति चीन की है.चीन की गोद में बैठकर पाकिस्तान वही कर रहा है जो चीन कह रहा है.चीन चाहता है कि चाहता है की कश्मीर का मुददा गर्म रहे आैर भारत इससे बाहर न निकल पाए.इसमें अगर कोर्इ स्कूली बच्चा मौत का शिकार हो जाए तो उसे अंतरराष्टीय मुददा बना पाए आैर फिर दबाव बने टेबल पर आकर बात करने का...उनकी शर्त पर
पकिस्तान-पकिस्तान में सरकार सेना चलाती है तो उसे मुल्क से बहुत मतलब नहीं है जितना ही युद्घ होगा उतना ही धनअर्जन होगा...इसी रणनीति पर काम करती है...रही बात अन्य चीजों की तो वहां उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं...परजीवी स्टेट की तरह कभी अमेरिका के रहमों करम पर ताे कभी चीन के रहमोंकरम पर अपने आप को जिंदा रखे हुए है.
भारत-भारत को रणनीति बदलनी होगी.पकिस्तान से काम नहीं चलेगा बल्कि आतंक की आहट क्या है उसे चीन को बताना होगा...वियतनाम से कुछ बात करनी होगी रूस से भी चर्चा जरूरी है...बाकी डोभाल से बताएंगी
सेना-यह पहली बार नहीं है.१९५० से यह चला आ रहा है.यह टेरन इतनी खतरनाक है कि यहां यह सब हाेता रहता है...यह अलग बात है की कारगिल की युद्घ के बाद शहीद घर पहुंचने लगे हैं आैर सब बातें सामने आने लगी हैं वरना यह बातें सेना बताती नहीं थी.उसे अपने तरीके से सुलझाती थी...अब सेना का तरीका क्या है यह बताने की जरूरत नहीं है
मायने---मतलब यह कि अब असली जंग पकिस्तान से नहीं अर्थव्यवस्था से है जो कि चीन की है...अगर उसे तोडना है ताे उससे व्यापार बंद करना होगा...चीन से व्यापार आज अगर बंद करने की घोषणा हो जाए तो कश्मीर में पत्थरबाजी कल ही रूक जाएगी.सबसे बडा आयात हम चीन से करते हैं आैर इसे तोडना होगा...एेसा होते ही पूरी चीनी अर्थव्यवस्था हिल जाएगी आैर हमें जरूरत नहीं होगी जंग की...सीधी बात की कश्मीर में छदम हस्ताक्षेप चीन बंद करें...वरना जंग का तरीका बदलने में हम कम नहीं है...सरकार को अब हवार्इ दौरे के बजाय जमीन पर, अर्थव्यवस्था पर जंग की तैयारी करनी होगी

कश्मीर-यहां सरकार को भी समझाने का तरीका बदलना होगा आैर युवाआें को भी समझने का...२०१० में मैने कश्मीर गया था वहां मैने सीधे बात की कि अगर अवसर मिले तो कहां जाएंगे पकिस्तान...चीन...आजादी या भारत...साफ कहा था पकिस्तान में हम मुहाजिर हो जाएंगे जनाब जाने का मतलब ही नहीं...चीन से तो कोर्इ मतलब ही नहीं है आैर आजाद होकर करेंगे क्या है क्या हमारे पास...भूखे मरने की नौबत आ जाएगी...भारत ही हमारे लिए बेहतर है...अब अगर ये बात है तो फिर इसे बढानी होगी एक बात आैर कही थी कि हमें मुफती आैर अब्दुल्ला परिवार से आजादी चाहिए अब इसके मायने में नहीं समझ पाया...कश्मीरियों को तय करना होगा कि उन्हें सच में क्या चाहिए

Monday, February 6, 2017

पत्रिका में पांच साल

आज की एेसी ही शाम करीब ७ बजे राजस्थान पत्रिका को पांच साल पहले मैनें ज्वाइन किया था.हालांकि आधिकारिक रूप में ७ फरवरी को ज्वाइनिंग हुर्इ लेकिन झालाना कार्यालय में ६ फरवरी को ही पहुंच गया था. तत्कालीन संपादक श्री मनोज माथुर ने मुझे ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा जी के नेतृत्व में काम करने के आदेश दिया. धर्म, पर्यटन, कृषि से शुरू हुआ सिलसिला रेलवे, एयरपोर्ट, मौसम, परिवहन, रोडवेज, एसीबी, सीबीआर्इ, फाइनेंस, डीआरआर्इ, र्इडी के रास्ते पर निकल पडा.
यहीं मुलाकात हुर्इ श्री अशोक शर्मा जी से आैर संपादक आशुतोष जी से. अशोक जी ने खबरों की बारीकियां इतनी सिखार्इं कि एक माह में ३७ एक्सक्लूसिव खबर आैर फिर एक ही दिन तीन बार्इलाइन तक मिली.आशुतोष जी ने खबर के हर पहलु को लाने के लिए टकराने की ताकत दी.हर खबर पर हमेशा नजर मारने का मौका मिला.
यहीं आगरा से आए श्यामवीर के साथ मिलकर हमने खबर ब्रेक की थी कि युवा देश से आतंकी बनने जा रहे हैं. कुछ कारणों से छप नहीं पार्इ लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने जब तीन महीने बार खबर मुंबर्इ से ब्रेक की तो बहुत खुशी हुर्इ देख कि खबर हमारे पास जयपुर में भी थी.
तत्कालीन डेस्क हेड राजीव जैन जी की बात किए बिना बता अधूरी है.फोन पर खबर आैर किसी भी अंतिम समय पर खबर देने के बाद भी खबर का टीरटमेंट दे देना, एेसा व्यक्ति अब तक नहीं देखा, यही वजह रही कि खबरों की धुंआधर बैटिंग हुर्इ. हमारे लिए यह तिकडी तबाडतोड खबरें लिखने का मौका लेकर आर्इ; बाद में क्राइम कल्स्टर हेड फिर आशुतोष जी के सन्निध्य में स्टेट ब्यूरो, भोपाल स्टेट ब्यूरो फिर लौट कर साफ सीधी बात वाले शख्सदौलत सिंह चौहान जी के साथ भी काम करने का मौका मिला. २०१६ में मेरे जीवन की सबसे बडी बात हुर्इ सुरेश व्यास सर ने मुझे सैन्य बलों की खबरों को लिखना सिखाया, रात में बैठाकर इसकी पढार्इ करार्इ. संस्थान ने इस दौरान मुझे सैन्य बलों की एक माह का प्रशिक्षण लेने का भी अवसर दिया.
इन पांच सालों के दौरान अधीर हो जाने पर कर्इ वरिष्ठजन ने मुझे बल दिया.जैन सर, तिवारी सर, पाराशर सर, मलिक सर, गांधी सर, संदीप सर सहित कर्इ एेसी शख्सियत हैं.

Thursday, November 24, 2016

फर्जी पायलट बनाने वाली हिसार हवार्इपटटी से कालेधन का खेल

हरियाणा का हिसार हवार्इअडडा यूं तो छोटी सी हवार्इपटटी है लेकिन बदनामी में इसका नाम सबसे बडा है.फिर चाहे फर्जी पायलट तैयार करने का मामला हो या फिर अब काले धन की हेराफेरी का.शांंत पडा रहने वाला हिसार का हवार्इअडडा प्रधानमंत्री मोदी के नोट बंद की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चार्टर विमान संचालित करने वाला हवार्इअडडा बन गया.सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां से हर दिन दो से तीन उडान हुर्इ है आैर वह भी सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों के लिए.

कालाधान खापने का काला खेल
दरअसल पूर्वोत्तर राज्याें कर्इ जनजातियों को हर प्रकार के आयकर प्रावधान से छुट मिली हुर्इ है.कोर्इ भी आयकर के दायरे में नहीं आता है आैर न ही कोर्इ कानून लागू होता है.अब इसी गलियारे को चोरटाइप के चाटर्ड एकाउंटेंटस ने कालाधान का गलियारा बना डाला. नोट बंद की घोषणा के बाद एक के बाद एक चाटर्ड विमान दीमापुर पहुंचने लगे.

तीन करोड ने बिगडा खेल

इसी दौरान साढे तीन करोड रूपए पकडे गए आैर फिर रहस्मय तरीके से गायब भी हुए आैर अब फिर मिल गए हैं लेकिन इस छानबीन के दौरान जो चौंकाने वाली जानकारी आयकर अधिकारियों के सामने आर्इ उसने होश उडा दिए.आननफानन में चाटर्ड विमानों के रूट परमिशन डीजीसीए आैर एटीसी से मांगए गए आैर अब सभी उडानों की जांच शुरू हो गर्इ है.

शादी विवाह के बहाने खप रहे नोट

आयकर विभाग से जुडे एक अधिकारी का कहना है कि नोट खपाने के लिए करोडपति परिवारों ने शादी का बहाने भी उपयोग किया है.एक राज्य जिसमें सबसे ज्यादा शादियों होती है.अब वह भी दायरे में है.शादी में परिवार को लाने ले जाने के बहाने रकमो की भी हेराफेरी हुर्इ है;

इन राज्यों में है छूट
लददाख
मिजोरम
असम
मेघालय
मणिपुर
नागलैंड
त्रिपुरा
अरुणाचल प्रदेश

Thursday, November 10, 2016

उत्तर प्रदेश की त्रिशंकु विधानसभा की बिछती चौसर


उत्तर प्रदेश में सर्द की दस्तक के साथ चुनावी चौसर ने सरगर्मी बढ गर्इ है.राजनीति गलियारे भरे हुए हैं आैर बाहरी तापमान भले ही २४ हो लेकिन पार्टी मुख्यालयों के तापमान पर मर्इ का मौसम हावी है.चुनावी चौसर की बिछ रही बिसात में सभी अपनी मोहरें बिछने व्यस्त हैं.कोर्इ टिकट के लिए लाइन लगा रहा है तो कोर्इ मुख्यमंत्री पद का सपना संजाेए हैं.इस बिछती हुर्इ बिसात में मन किया की सबके दिल की हालत देखी जाए.चुनावी कबडडी में एक बार फिर से ताल ठोंकी जाए.मुलायम के दांव की मायावती के बिसात की आैर भाजपा के चार की आैर कांग्रेस के कमाल की चर्चा की जाए.फिर चार दिन का यह दृश्य हमें नजर आया.
भाजपा का पलडा फिलहाल भारी है.पिछले चुनाव में दूसरे तीसरे आैर चौथे नंबर पर रहे कर्इ प्रत्याशी पहले से ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं. बाकी एक नंबर पर विजय पाने वाले भी टिकट के लिए लाइन में हैं. इतिहास गवाह है कि टिकट बंटने में जब जिस पार्टी में हंगामा हो तो वह जीत रही है.
लखनउ, बाराबंकी, फैजाबाद, बस्ती, कुशीनगर, गोरखपुर, गाेंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, उन्नाव, अकबरपुर, कानपुर का कमोवेश यही हाल है.मतदाता यूं तो किसी से खुश नहीं है लेकिन यह भी सोच रहा कि एक बार मायावती आैर फिर मुलायम के बाद अब क्यों न उत्तर प्रदेश में भगवा रंग को भी देख लिया जाए.
बसपा पर इस बार मुस्लिम प्रत्याशी की होड लगी है अगर एेसा रहा है तो २९ प्रतिशत के वोट से मुख्यमंत्री तय करने वाले इस प्रदेश में मायावती का पलडा भारी है यह एसी आैर मुस्लिम को वोट प्रतिशत ३५ पार कर जाएगा खास बात यह है कि यह वर्ग वोट डालने के लिए जाने वाला वर्ग है.हालांकि कुर्सी पर कब्जा दिलाने वाले पंडित जी इस बार गायब हैं.
सपा के लिए खतरे की घंटी परिवार से ही नहीं समाज से भी बजी है.मुस्लिम यादव की गठजोड में ठाकुर साहब के ताव पर सवार होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज सपा से मुस्लिम सटक रहा है.ठाकुर साहब भी खासे प्रभावित नहीं हैं इस बार आजम के बजाय नसीमुदृदीन सिदृकी चल रहे हैं.यादव जी की वजह से अन्य आेबीसी पहले ही झटका दे रहे हैं फिर चाहे वह पटेल लाबी हो यह फिर मौर्या
कांग्रेस २००९ के लोकसभा चुनाव में कमाल करने वाली कांग्रेस को इस प्रत्याशी भी मिलते नहीं दिखार्इ दे रहे हैं.जिलों के जिलाध्यक्ष ही पोस्टर बैनर चिपका कर दिल पर मरहम लगा रहे हैं.करीब चार दिनों में ९०० किलोमीटर की यात्रा में कांग्रेस के एक दो पोस्टर के अलावा दिवाली आैर छठ की बधार्इ का भी बैनर दिखार्इ नहीं दिया.
अंत में उत्तर प्रदेश की राजनीति में खेल बनाने बिगडने का काम पीस पार्टी,पटेल पार्टी, हैदराबाद वाली पार्टी आैर राजा भैया की एकल पार्टी सहित अन्य पार्टियां करेंगी.

चलते-चलते---नोट के सर्जिकल स्टाराइक ने भाजपा को आैर मजबूत कर दिया है मोदी का यह फैसला वोटरों को खासा लुभा रहा है एेसे में अगर भाजपा का प्रचार तंत्र बेहतर रहा आैर स्थानीय स्तर पर आेम माथुर सही प्रत्याशी चुन पाए तो भाजपा चुनाव जीत जाएगी वरना विधानसभा त्रिशंकु हो जाएगी.एेसे में अपनी जगह बचाने के लिए तीनों पार्टी गठबंधन कर सकती हैं क्यों कि सभी का मकसद एक है कि किसी भी तरह भाजपा की सत्ता को रोका जाए.

जब विद्यासागर जी ने चप्पल फेंकी

जब विद्यासागर जी ने चप्पल फेंकी फिर एक चप्पल चली। रोज ही कहीं ना कहीं यह पदत्राण थलचर हाथों में आ कर नभचर बन अपने गंत्वय की ओर जाने क...