Thursday, August 31, 2017

जब चीन हुआ हादसा तो हुआ रेल मंत्रालय हुआ भंग, मंत्री गया जेल

चीन में 2011 में हुए हादसे में कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई थी.
चीन के जिझियांग में 24 जुलाई, 2011 को एक रेल हादसा हुआ था. इसमें दो हाई स्पीड ट्रेनें एक ही पटरी पर आ गई थीं. हादसे में 35 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इस हादसे को चीन के सबसे बड़े हादसों में से एक करार दिया जाता है. हादसे के तुरंत बाद ही रेल मंत्री शेंग गुआंझू मौके पर पहुंच गए. उन्होंने इस हादसे के लिए माफी मांगी और जांच के आदेश जारी कर दिए. चीन के उपप्रधानमंत्री झांग डेजियांग भी तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य की देखभाल करने लगे. इसके तत्काल बाद रेलवे की ओर से बताया गया कि रेल विभाग के तीन बड़े अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया. इनमें शंघाई रेलवे ब्यूरो के प्रमुख, उप प्रमुख और पार्टी महासचिव शामिल थे. हादसे के बाद रेल मंत्रालय की ओर से 2 महीने के लिए सेफ्टी कैंपेन भी चलाया गया. हादसे की जांच के दौरान पता चला था कि हादसा सिग्नल फेल होने की वजह से हुआ था. इसके बाद 2013 में रेल मंत्रालय को भंग कर दिया गया. चीन ने हादसे के बाद ट्रेन की रफ्तार को 350 किलोमीटर प्रति घंटा से घटाकर 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा पर ला दिया. इतना ही नहीं रेलवे के किराए में भी पांच फीसदी की कमी कर दी गई.
चीन के पूर्व रेल मंत्री लियू झीजून जो अब भी जेल में हैं.
चीन में फरवरी 2011 तक रेल मंत्री थे लियू झीजून. हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए 800 मिलियन युआन घूस लेने का आरोप लगा, जिसके बाद चीन की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. चीन के डिप्टी चीफ इंजीनियर झांस शुजुआंग को भी फरवरी 2011 में ही गिरफ्तार कर लिया गया. 8 मई, 2013 को चीन की एक अदालत ने घूस लेने और अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप में फांसी की सजा सुना दी. हालांकि दिसंबर 2015 में कोर्ट ने लियू की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था.अब यहां भी वक्त आ गया है कि रेल हादसों की जिम्मेदारी तय की जाए. हम चीन जैसी सख्ती दिखाने की बात नहीं कर रहे, लेकिन कम से कम ऐसे इंतजाम तो हो ही जाएं कि कुछ खास वजहों से हो रहे रेल हादसों पर रोक लगाई जा सके.

Wednesday, August 30, 2017

यश भारती पुरस्कार के चाटुकार और लंपट पत्रकार


यश भारती पुरस्कार के चाटुकार और लंपट पत्रकार
शिखा पाण्डे- दूरदर्शन की एक्सटर्नल कोऑर्डिनेटर। 2016 में उनके नाम की अनुशंसा लखनऊ के तत्कालीन एडीएम जय शंकर दुबे ने की थी। पाण्डेय की सीवी में लिखा है कि उन्होंने चार साल तक मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम का आयोजन किया जिसकी प्रशंसा सीएम ने भी की।
नोट—पांडे जी आप ने कमाल की कर दिया, वैसे कई पांडे देखा चुका हूं लेकिन सब आप से तरे तरे हैं, मुख्यमंत्री आवास पर कार्यक्रम के लिए तो नहीं लेकिन लगता है बच्चों को खिलाने लिए पुरस्कार मिला है
अशोक निगम- 2013 में यश भारत पाने वाले निगम ने सीवी में लिखा है, “संप्रति समाजवादी पार्टी की पत्रिका समाजवादी बुलेटिन का कार्यकारी संपादक।” निगम ने खुद को समाजवादी विचारधारा का लेखक बताया था।
नोट—इनसे मिलिए समाजवादी विचारधारा के ये दल्ले दामाद हैं ये
हेमंत शर्मा- हाल ही में इंडिया टीवी से इस्तीफा देने वाले पत्रकार। उनकी सीवी में लिखा है, “पहले लेखन को गुजर बसर का सहारा माना, अब जीवन जीने का।” शर्मा की सीवी में दावा किया गया है कि वो 1989, 2001 और 2013 का महाकुम्भ कवर करने वाले एकलौते पत्रकार हैं।
नोट—इतना बडा फर्जी आदमी कि 2013 में ये अकेला पैदा हुआ था कुंभ में ये, सुना है इसके साथ जयपुर में भी कुछ छेडछाड हुई थी दारू को लेकर
अब मिलिए नवाबजादे से हूकुमत चली गई लेकिन अभी भी नशे में 
नवाब जफर मीर अब्दुल्लाह- नवाब को खेल वर्ग में यश भारती मिला। वो अवध रियासत के वजीर रहे नवाब अहमद अली खान के वंशज हैं। उनकी सीवी में लिखा है कि वो “कारोबारी” हैं और उनका आवास “लखनऊ और पूरा भारत” है।
समाजवादी नचनिए को भी मिला यश भारती, फिर तो सलमान के बैक डांसर को भी मिलना चाहिए था
काशीनाथ यादव- समाजवादी पार्टी के सांस्कृतिक सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष। उन्होंने 27 अप्रैल 2016 को पार्टी के लेटरहेड पर अपनी सीवी भेजी। उनकी सीवी में लिखा है कि उन्होंने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम किए, गीत गाए और समाजवादी पार्टी की योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया। काशीनाथ यादव ने ये भी लिखा कि उन्होंने 1997 में सैफई महोत्सव में भोजपुरी लोकगीत गाया था।
बढिया लौंडा पैदा किया नेता जी ने
मणिन्द्र कुमार मिश्रा- सपा नेता मुरलीधर मिश्रा के बेटे। आईआईएमसी से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले मिश्रा ने अपने सीवी में लिखा है कि उन्होंने साल 2010 में मेघालय के खासी जनजाति के बीच रहकर दो महीने तक फील्डवर्क किया था। मिश्रा ने अखिलेश यादव पर “समाजवादी मॉडल के युवा ध्वजवाहक” नामक किताब भी लिखी है।
जिसकी मनोदशा ही ठीक नहीं उसे मनोविज्ञान में यशभारती
ओमा उपाध्याय- साल 2016 में यश भारती पाने वाले उपाध्याय ने अपनी सीवी में लिखा है कि उन्होंने 2010 में ज्योतिष और मनोविज्ञान आधारित विशेष वस्त्र बनाने की युगांतकारी तकनीकी विकसित की थी।
लो ये भी हैं इन्हें छम्मा छम्मा के लिए मिला यश भारती 
अर्चना सतीश- अर्चना सतीश के नाम को 27 अक्टूबर 2016 को यश भारती पुरस्कार समारोह में ही मंच पर अखिलेश यादव ने मंजूरी दे दी। अर्चना सतीश कार्यक्रम का संचालन कर रही थीं। उनकी सीवी में लिखा है, “प्रतिष्ठित सैफई महोत्सव का पिछले तीन सालों से संचालन”,  और ” 4-5 जनवरी 2016 को आगरा में यूपी सरकार के अतिप्रतिष्ठित एनआरआई दिवस कार्यक्रम का संचालन”
अब बंट ही रहा है प्रसाद तो थोडा हम ले लें तो क्या हरज
सुरभी रंजन- उस समय यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन की पत्नी। उन्हें एक प्रतिष्ठित गायिका बताया गया है।
कांग्रेजी बिटिया होना का कुछ तो फायदा होना ही चाहिए न
शिवानी मतानहेलिया– दिवंगत कांग्रेसी नेता जगदीश मतानहेलिया की बेटी। शिवानी प्रतापगढ़ के एक कॉलेज में संगीत पढ़ाती हैं।

...जो लौटकर सत्ता में न आए,

राजनीति में पैराशूट नेता तो आपने बहुत देखे होंगे लेकिन पैराशूट मुख्यमंत्री भी कई पाए गए हैं, यहां पैराशूट का पर्याय बदल रहा है और इसे अब उच्च सदन का नाम दिया जा रहा है, देखने में यह आया है कि जो नेता उच्च सदन से मुख्यमंत्री बना है वह दुबारा मुख्यमंत्री नहीं बना है, इसकी बानगी देखिए ...ऐसे में योगी का योग कुछ ठीक नहीं लग रहा है
उत्तर प्रदेश में उच्च सदन से मुख्यमंत्री बनने वाले दोबारा सत्ता में नहीं लौटे। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल सम्पूर्णानंद का और दूसरे नंबर अखिलेश यादव का रहा। उच्च सदन से मुख्यमंत्री बनने के बाद दुबारा सत्ता में न आने का रिकार्ड मायावती 2007, अखिलेश यादव 2012 के नाम है। अब आदित्य योगी नाथ भी विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। 
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल सम्पूर्णानंद जी का रहा। जो वाराणसी दक्षिण से विधायक हुआ करते थे। 5 वर्ष, 344 दिन तक मुख्यमंत्री रहे। दूसरे नंबर पर अखिलेश यादव 5 वर्ष, 108 दिन तीसरे नंबर पर मायावती 4 वर्ष, 360 दिन, चौथे नंबर पर पहले मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत 4 वर्ष, 335 दिन जो बरेली नगरपालिका से चुनाव जीते थे। सबसे छोटा कार्यकाल चन्द्रभानु गुप्ता का रहा जो 19 दिन तक मुख्यमंत्री रहे।
चौधरी चरण सिंह 328 दिन, त्रिभुवन नारायण सिंह 167 दिन, कमलापति त्रिपाठी 2 वर्ष, 69 दिन, राम नरेश यादव 1 वर्ष, 249 दिन, बनारसी दास 354 दिन, विश्वनाथ प्रताप सिंह 2 वर्ष, 39 दिन, श्रीपति मिश्र 2 वर्ष, 14 दिन, मुलायम सिंह यादव 3 वर्ष, 257 दिन, कल्याण सिंह 2 वर्ष, 52 दिन, राजनाथ सिंह 1 वर्ष, 131 दिन, रामप्रकाश गुप्त 351 दिन उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली है।

Tuesday, August 29, 2017

रेलवे है या मौत होने के बाद आने वाला महापं​डित

अब कह रहा है कि हर आदमी से चाहिए 11 हजार तब होगा उदधार
वैतरणी पार लगाने के लिए जिस तरह पंडित मांगते है उसी तरह अब रेलवे का चा​हिए 
रेल मंत्रालय को अलग-अलग कामों के लिए 8,56,020 करोड़ रुपये की जरूरत है. 
सुरक्षित और मुनाफे की रेल के लिए का यह एक्शन प्लान अगले 5 साल के लिए है.
यात्री किराए से घाटा --(लगभग 34,000 करोड़ रुपये)
7वें वेतन आयोग का भार--- (30,000 करोड़ रुपये) 
प्रोजेक्ट्स के लिए-- 4.83 लाख करोड़ रुपये
पंचवर्षीय जीर्णोद्धार--- 14,03,020 करोड़ रुपये की जरूरत है.
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5 साल तक इन कामों के लिए चाहिए लाखों करोड़ 
नेटवर्क डीकंजेशन : 1,99,320 करोड़
नेटवर्क विस्तार (इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है): 1,93,000 करोड़
सुरक्षा के लिए (ट्रैक रिन्यूवल और ब्रिज निर्माण): 1,27,000 करोड़
लोकोमोटिव, कोच और वैगन (प्रोडक्शन और मेंटेनेंस): 1,02,000 करोड़
रेलवे स्टेशन विकसित करने और लॉजिस्टिक पार्क : 1,00,000 करोड़
हाई स्पीड रेल और एलीवेटेड कॉरिडोर : 65,000 करोड़
नॉर्थ ईस्ट और जम्मू-कश्मीर तक रेलवे कनेक्टिविटी: 39,000 करोड़
पैसेंजर सुविधा, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और अन्य : 30,700 करोड़
इन स्थितियों में आपकी जेब से कितना जाएगा
--सबसे टैक्स वसूला जाता है तो सभी 10,792 रुपये देने होंगे.
--टैक्स पेयर से वसूला जाता है तो प्रति टैक्सपेयर 2 लाख 80 हजार रुपये देय है.

Friday, August 18, 2017

एक कहानी सोनार की...

आनंद मणि समुद्री तट से
ये बात ​​​पिछले साल की ही तो है.हम 36 पत्रकार एक ऐसी यात्रा पर थे जहां हम दुबारा किसी भी सूरत में नहीं जाए सकते, एक माह के लिए एक साथ. सुबह सात बजे से ही प्रक्रिया शुरू हो गई .हम बस से यथास्थान पहुंच गए.आज के दिन हम ऐसी जगह थे.जहां हर किसी को प्रवेश नहीं मिलता,जगह का उल्लेख इसलिए नहीं क्योंकि यही करना जरूरी है. जल की जान बसती है
​​पोत का प्राण होता है 
सोने से महंगा सोनार 
पहली बार यहीं सुना हमनें 

यह वह सोनार है जिसने गाजी को चकमा देकर उसका तख्ता पलट दिया था और पाकिस्तान को अपने दूसरे युद्ध में मुंह की खानी पडी. हमने यहां देखा किस तरह से कागज पानी में डूब जाए तो भी वह गिला नहीं होता. पानी को उल्टा लटका दो फिर भी वह गिरता नहीं.पहली बार लोहार से खतरनाक सोनार देखा .सोनार इतना खतरनाक की वह अलग—अलग विमानों की ​फ्रिक्वेंसी छोड सकता है.

ऐसी कई नायाब चीजें हमने देखीं बेहद नजदीक से आप यूं भले ही लगता हो कि वैज्ञानिक कुछ नहीं कर रहे हैं लेकिन जितने सी​मित साधन में वह अपने लक्ष्य को साध रहे हैं शायद ही कोई देश होगा जो इतना बेहतर परिणाम इतने कम संसाधन में दे सके और अंत आप लोगों को लजीज व्यंजन का स्वाद याद ही होगा 
बाकी अगले अंक में 
राय देते रहिए कुछ याद दिलाते रहिए अगले तीस दिन तक हम आपको यूं ही दोबारा यात्रा कराने की को​शिश करेंगे




सरकार राज 


दादा भात और रॉयल राजेश 

कन्या ग्रुप 

खास लोगो के साथ आम 36 


Monday, May 1, 2017

चीन खेल रहा है कश्मीर में खून की होली...

आज अखबार शहीदों की खबर से रंग गए हैं आैर सरकार जुमलों के रंग से...रटा रटाया बयान आ गया है कि शहादत बेकार नहीं जाएगी...तो भार्इ शहादत बेकार कब गर्इ है...आज मैं आपको बताने की कोशिश करूंगा कि कश्मीर में असल में क्या हो रहा है आैर फिर इसके पीछे की कहानी क्या है...

पत्थरबाजी-इन दिनों कश्मीर में जिस तरह से पत्थरबाजी बढी इसके मायने बहुत दूसरे हैं..पहले यह पत्थरबाजी पैसे के लिए सिर्फ युवा करते नजर आते थे अब इसमें स्कूली बच्चे भी शामिल हो गए हैं दरअसल अब कश्मीर में सिर्फ पकिस्तान का इंटेरेस्ट नहीं है इसमें चीन भी शामिल हो गया है.इसके इशारे पर अब पत्थर का इस्लामीकरण कर दिया गया है...युवाआें काे बरगलाकर यह परिभाषित किया गया कि जिस तरह मक्का मदीना में हज करके शैतान को पत्थर मारने से बरकत मिलती है..वही बरकत मिलेगी आैर इसमें आतंकी मौलाना कामयाब रहे आैर इस समय बच्चों को सेना शैतान की शक्ल में नजर आ रही है.

चीन-पकिस्तान की कश्मीर नीति अब चीन ही तय कर रहा है.इसी नीति के तहत अब बलूचिस्तान को पांचवा राज्य घोषित करने जा रहा है.यह विवादित क्षेत्र है आैर एेसा हाेता है तो फिर भारत के लिए चिंता की बात है.दूसरी बात जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सर्इद पर वीटो लगाकर उसने चरमपंथी गुटों को भी अपने पक्ष में कर लिया है...या यूं कहें कि उन्हें हफता दिया है उनकी जान बचाने का
आैर अब पूरे पकिस्तान में उसकी सडक परियोजना भी आरपार हो रही है जाे चीन के लिए न केवल नया बाजार बनेगी बल्कि रणनीतिक रूप से भी यह बेहद कारगर होगी. चीन अपने पर्ल नेक कार्यक्रम के तहत पूरे भारत को घेरने में लगा हुआ है आैर पिछले साल हुर्इ राजनीतिक चूक के कारण चीन नेपाल में घुसने में कामयाब रहा आैर वह अब रेललाइन बिछाने जा रहा है...यानी अब भारत के भीतर अब नक्सलियाें को वह नेपाल में बैठकर मदद करेगा
पत्थरबाजी को लेकर पकिस्तान की बदली रणनीति चीन की है.चीन की गोद में बैठकर पाकिस्तान वही कर रहा है जो चीन कह रहा है.चीन चाहता है कि चाहता है की कश्मीर का मुददा गर्म रहे आैर भारत इससे बाहर न निकल पाए.इसमें अगर कोर्इ स्कूली बच्चा मौत का शिकार हो जाए तो उसे अंतरराष्टीय मुददा बना पाए आैर फिर दबाव बने टेबल पर आकर बात करने का...उनकी शर्त पर
पकिस्तान-पकिस्तान में सरकार सेना चलाती है तो उसे मुल्क से बहुत मतलब नहीं है जितना ही युद्घ होगा उतना ही धनअर्जन होगा...इसी रणनीति पर काम करती है...रही बात अन्य चीजों की तो वहां उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं...परजीवी स्टेट की तरह कभी अमेरिका के रहमों करम पर ताे कभी चीन के रहमोंकरम पर अपने आप को जिंदा रखे हुए है.
भारत-भारत को रणनीति बदलनी होगी.पकिस्तान से काम नहीं चलेगा बल्कि आतंक की आहट क्या है उसे चीन को बताना होगा...वियतनाम से कुछ बात करनी होगी रूस से भी चर्चा जरूरी है...बाकी डोभाल से बताएंगी
सेना-यह पहली बार नहीं है.१९५० से यह चला आ रहा है.यह टेरन इतनी खतरनाक है कि यहां यह सब हाेता रहता है...यह अलग बात है की कारगिल की युद्घ के बाद शहीद घर पहुंचने लगे हैं आैर सब बातें सामने आने लगी हैं वरना यह बातें सेना बताती नहीं थी.उसे अपने तरीके से सुलझाती थी...अब सेना का तरीका क्या है यह बताने की जरूरत नहीं है
मायने---मतलब यह कि अब असली जंग पकिस्तान से नहीं अर्थव्यवस्था से है जो कि चीन की है...अगर उसे तोडना है ताे उससे व्यापार बंद करना होगा...चीन से व्यापार आज अगर बंद करने की घोषणा हो जाए तो कश्मीर में पत्थरबाजी कल ही रूक जाएगी.सबसे बडा आयात हम चीन से करते हैं आैर इसे तोडना होगा...एेसा होते ही पूरी चीनी अर्थव्यवस्था हिल जाएगी आैर हमें जरूरत नहीं होगी जंग की...सीधी बात की कश्मीर में छदम हस्ताक्षेप चीन बंद करें...वरना जंग का तरीका बदलने में हम कम नहीं है...सरकार को अब हवार्इ दौरे के बजाय जमीन पर, अर्थव्यवस्था पर जंग की तैयारी करनी होगी

कश्मीर-यहां सरकार को भी समझाने का तरीका बदलना होगा आैर युवाआें को भी समझने का...२०१० में मैने कश्मीर गया था वहां मैने सीधे बात की कि अगर अवसर मिले तो कहां जाएंगे पकिस्तान...चीन...आजादी या भारत...साफ कहा था पकिस्तान में हम मुहाजिर हो जाएंगे जनाब जाने का मतलब ही नहीं...चीन से तो कोर्इ मतलब ही नहीं है आैर आजाद होकर करेंगे क्या है क्या हमारे पास...भूखे मरने की नौबत आ जाएगी...भारत ही हमारे लिए बेहतर है...अब अगर ये बात है तो फिर इसे बढानी होगी एक बात आैर कही थी कि हमें मुफती आैर अब्दुल्ला परिवार से आजादी चाहिए अब इसके मायने में नहीं समझ पाया...कश्मीरियों को तय करना होगा कि उन्हें सच में क्या चाहिए

Monday, February 6, 2017

पत्रिका में पांच साल

आज की एेसी ही शाम करीब ७ बजे राजस्थान पत्रिका को पांच साल पहले मैनें ज्वाइन किया था.हालांकि आधिकारिक रूप में ७ फरवरी को ज्वाइनिंग हुर्इ लेकिन झालाना कार्यालय में ६ फरवरी को ही पहुंच गया था. तत्कालीन संपादक श्री मनोज माथुर ने मुझे ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा जी के नेतृत्व में काम करने के आदेश दिया. धर्म, पर्यटन, कृषि से शुरू हुआ सिलसिला रेलवे, एयरपोर्ट, मौसम, परिवहन, रोडवेज, एसीबी, सीबीआर्इ, फाइनेंस, डीआरआर्इ, र्इडी के रास्ते पर निकल पडा.
यहीं मुलाकात हुर्इ श्री अशोक शर्मा जी से आैर संपादक आशुतोष जी से. अशोक जी ने खबरों की बारीकियां इतनी सिखार्इं कि एक माह में ३७ एक्सक्लूसिव खबर आैर फिर एक ही दिन तीन बार्इलाइन तक मिली.आशुतोष जी ने खबर के हर पहलु को लाने के लिए टकराने की ताकत दी.हर खबर पर हमेशा नजर मारने का मौका मिला.
यहीं आगरा से आए श्यामवीर के साथ मिलकर हमने खबर ब्रेक की थी कि युवा देश से आतंकी बनने जा रहे हैं. कुछ कारणों से छप नहीं पार्इ लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने जब तीन महीने बार खबर मुंबर्इ से ब्रेक की तो बहुत खुशी हुर्इ देख कि खबर हमारे पास जयपुर में भी थी.
तत्कालीन डेस्क हेड राजीव जैन जी की बात किए बिना बता अधूरी है.फोन पर खबर आैर किसी भी अंतिम समय पर खबर देने के बाद भी खबर का टीरटमेंट दे देना, एेसा व्यक्ति अब तक नहीं देखा, यही वजह रही कि खबरों की धुंआधर बैटिंग हुर्इ. हमारे लिए यह तिकडी तबाडतोड खबरें लिखने का मौका लेकर आर्इ; बाद में क्राइम कल्स्टर हेड फिर आशुतोष जी के सन्निध्य में स्टेट ब्यूरो, भोपाल स्टेट ब्यूरो फिर लौट कर साफ सीधी बात वाले शख्सदौलत सिंह चौहान जी के साथ भी काम करने का मौका मिला. २०१६ में मेरे जीवन की सबसे बडी बात हुर्इ सुरेश व्यास सर ने मुझे सैन्य बलों की खबरों को लिखना सिखाया, रात में बैठाकर इसकी पढार्इ करार्इ. संस्थान ने इस दौरान मुझे सैन्य बलों की एक माह का प्रशिक्षण लेने का भी अवसर दिया.
इन पांच सालों के दौरान अधीर हो जाने पर कर्इ वरिष्ठजन ने मुझे बल दिया.जैन सर, तिवारी सर, पाराशर सर, मलिक सर, गांधी सर, संदीप सर सहित कर्इ एेसी शख्सियत हैं.

जब विद्यासागर जी ने चप्पल फेंकी

जब विद्यासागर जी ने चप्पल फेंकी फिर एक चप्पल चली। रोज ही कहीं ना कहीं यह पदत्राण थलचर हाथों में आ कर नभचर बन अपने गंत्वय की ओर जाने क...